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पाचोरा – शहर में इस वक़्त अवाम को बहुत ही संगीन और परेशान करने वाली पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। नल के ज़रिए जो पानी लोगों के घरों में आ रहा है, वो निहायत ही गंदा, बदबूदार और खराब है। उस पानी में कूड़ा-कचरा और मिट्टी साफ़ तौर पर देखा जा सकता है। इसी परेशानी को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (MIM) की पाचोरा तालुका और शहर शाखा की जानिब से नगर परिषद के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर (CIO) को एक तफ्सीली याददाश्त पेश की गई, जिसमें जल विभाग की लापरवाही के खिलाफ फौरन कार्रवाई की मांग की गई है। इस याददाश्त में साफ़ तौर पर कहा गया है कि पिछले कई हफ़्तों से शहर के तक़रीबन हर हिस्से में लोगों को बहुत ही खराब, बदबूदार और सेहत के लिए नुकसानदेह पानी सप्लाई किया जा रहा है। इस पानी को किसी भी तरह से फ़िल्टर या साफ़ किए बगैर सीधा नलों में छोड़ा जा रहा है। ये वही पानी है जो लोग खाने, पीने, नहाने और दीगर घरेलू ज़रूरतों के लिए इस्तेमाल करते हैं। ऐसे पानी की वजह से सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। इस गंदे और दूषित पानी की वजह से अवाम को दस्त, मलेरिया, डेंगू, स्किन डिज़ीज़, कॉलरा और टायफॉइड जैसे संगीन बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। ख़ास तौर पर बच्चे, बुज़ुर्ग और बीमार लोग ज़्यादा मुतास्सिर हो रहे हैं। बहुत सारे घरों में पूरे-पूरे खानदान बीमार पड़ गए हैं। सेहत की मौजूदा सहूलियतें पहले से ही नाकाफी हैं, और ऐसे में इस तरह के गंदे पानी ने हालत और बिगाड़ दी है। MIM के मुताबिक ये हालात एक किस्म की “जल आपदा” (Water Crisis) बन चुके हैं। इस परेशानी को देखते हुए MIM के ज़िला, तालुका और शहर के ज़िम्मेदारान ने मिलकर नगर परिषद के अफसरों से मुलाक़ात की और ये मांगें पेश कीं: जल विभाग को हिदायत दी जाए कि वो पूरे पानी सप्लाई सिस्टम की जांच करे। पानी फ़िल्टर करने वाले सिस्टम्स को तुंरत चेक करके उन्हें ठीक किया जाए। पानी की टंकियों और पाइपलाइनों की सफ़ाई करवाई जाए। लोगों को उनके घरों में सिर्फ़ साफ़, फ़िल्टर और पीने लायक पानी ही मुहैया कराया जाए। इस पूरे काम पर निगरानी रखने के लिए एक इंडिपेंडेंट कमेटी बनाई जाए जो लोगों से राय लेकर रिपोर्ट पेश करे। जिन लोगों की सेहत इस पानी की वजह से खराब हुई है, उनके लिए हेल्थ कैंप लगाकर फ्री इलाज मुहैया कराया जाए। इस मौक़े पर जो MIM ज़िम्मेदारान मौजूद थे, उनमें शामिल हैं : फहीम शेख (उपज़िला अध्यक्ष), सय्यद ताहेर अली (शहर अध्यक्ष), डॉ. अकील शेख (तालुका अध्यक्ष), अशफ़ाक खाटीक (कार्याध्यक्ष), हारून भाई बागवान (सामाजिक कार्यकर्ता), फारुख पिंजारी (सामाजिक कार्यकर्ता), तारिक सय्यद (सामाजिक कार्यकर्ता), सलीम गनी (मिस्त्री) और कई दीगर कार्यकर्ता। इस मौके पर फहीम शेख ने कहा, “हुकूमत और प्रशासन बार-बार अवाम की बुनियादी ज़रूरतों से मुंह मोड़ रहा है। पानी इंसान की बुनियादी हक़ है, और अगर टैक्स देने के बावजूद ज़हर जैसा पानी मिले, तो ये सरासर ज़ुल्म है।” शहर अध्यक्ष सय्यद ताहेर अली ने कहा, “मुल्क में आम आदमी बेहाल है। सिर्फ़ मीटिंग लेकर औपचारिकताएं पूरी करने से काम नहीं चलेगा। जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं, हम चैन से नहीं बैठेंगे।” डॉ. अकील शेख ने कहा, “डॉक्टर होने के नाते हम देख रहे हैं कि पानी की वजह से किस तरह गांवों की सेहत व्यवस्था तबाह हो रही है। अगर इसी तरह हालात रहे, तो आने वाले दिन और भी खतरनाक होंगे।” अशफाक खाटीक ने तंज़िया लहजे में कहा, “इलेक्शन के दौरान पानी की बातें करके वोट लिए जाते हैं, लेकिन जब देने की बारी आती है, तो जहर जैसा पानी दिया जाता है।” MIM का ये कदम सिर्फ़ एक सियासी पहल नहीं, बल्कि पाचोरा की अवाम के हक़ में एक बुलंद आवाज़ है। अगर प्रशासन वक़्त रहते चेत नहीं पाया, तो ये मुद्दा बड़ा आंदोलन बन सकता है। आख़िर में, ये कहा जा सकता है कि पाचोरा की जनता आज साफ़ पानी के लिए तरस रही है। अगर अब भी सख़्त कदम न उठाए गए, तो अवाम का ग़ुस्सा फूट सकता है और प्रशासन को भारी पड़ सकता है।
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