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❝ चेहरों पर मुस्कान रखना हर किसी के बस की बात नहीं,
जो दूसरों के दिलों में घर बना ले, वही असली बादशाह होता है। ❞ ईश्वर जब किसी व्यक्ति को केवल सफलता ही नहीं, बल्कि लोगों का प्रेम, विश्वास, सम्मान और आशीर्वाद भी देता है, तब वह व्यक्ति समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है। कुछ लोग पद से बड़े होते हैं, कुछ धन से, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जिनकी सबसे बड़ी पूँजी उनका स्वभाव, उनकी सादगी, उनका अपनापन और उनकी समाजसेवा होती है। ऐसे ही सर्वप्रिय, मिलनसार, हँसमुख, ऊर्जावान, जिंदादिल और कर्मयोगी व्यक्तित्व के धनी हैं आदरणीय श्री राजेश (बाबूजी) मोर ( Mo.98908 93131)उनका नाम लेते ही आँखों के सामने एक ऐसा व्यक्तित्व उभरता है जिसके चेहरे पर सदैव मुस्कान रहती है, जिसकी वाणी में आत्मीयता, व्यवहार में विनम्रता और हृदय में प्रत्येक व्यक्ति के लिए स्नेह एवं सम्मान भरा होता है। वे जहाँ भी जाते हैं, वहाँ अपने सहज स्वभाव और आत्मीय व्यवहार से लोगों का दिल जीत लेते हैं। शायद यही कारण है कि उन्हें जानने वाला प्रत्येक व्यक्ति उन्हें केवल नाम से नहीं, बल्कि प्रेमपूर्वक “बाबूजी” कहकर संबोधित करता है।
❝ ज़िंदगी की असली कमाई दौलत नहीं, दुआएँ होती हैं;
जो सबके काम आएँ, वही असली अमीर कहलाते हैं। ❞
यदि उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता बतानी हो तो निस्संदेह कहा जा सकता है कि युवाओं को भी मात देने वाला उनका उत्साह, ऊर्जा, सकारात्मक सोच और जीवन के प्रति उमंग उन्हें हर आयु वर्ग में लोकप्रिय बनाती है। वे जीवन को केवल जीते नहीं, बल्कि प्रत्येक क्षण को उत्सव में बदल देते हैं। कठिन परिस्थितियों में भी मुस्कुराते हुए आगे बढ़ना और दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाना उनकी सहज आदत है। वे अपने व्यवहार से यह सिद्ध करते हैं कि सच्चा व्यक्तित्व वही है जो स्वयं भी खुश रहे और दूसरों के जीवन में भी खुशियों का प्रकाश फैलाए। राजेश बाबूजी को समाजसेवा की प्रेरणा विरासत में मिली है। उनके पूज्य पिता स्वर्गीय श्री शांतिलाल मोर समाज, व्यापार और राजनीति के अत्यंत सम्मानित व्यक्तित्व थे। उन्होंने व्यापारी मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष, पूर्व नगरसेवक, तथा समय-समय पर भारतीय जनता पार्टी के जिला, तालुका एवं शहर अध्यक्ष के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया। जनसंघ के समय से संगठन विस्तार के लिए उनका अथक परिश्रम आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का विषय है। समाजहित को सर्वोच्च स्थान देना और लोगों के सुख-दुःख में सहभागी बनना उनके जीवन का मूलमंत्र था। यही संस्कार राजेश बाबूजी को पारिवारिक धरोहर के रूप में प्राप्त हुए और उन्होंने इस अमूल्य विरासत को अपने कर्मों से और अधिक गौरवान्वित किया। आज वे उसी सेवा परंपरा को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में वे शिवसेना तालुका व्यापारी सेना प्रमुख के रूप में व्यापारी वर्ग की समस्याओं के समाधान के लिए सदैव सक्रिय रहते हैं। व्यापारियों को संगठित करना, उनके अधिकारों की रक्षा करना और प्रशासन तथा समाज के बीच विश्वास का मजबूत सेतु बनना उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता है। उन्होंने पूर्व पाचोरा पीपल्स बैंक संचालक के रूप में भी अपनी जिम्मेदारियों का अत्यंत ईमानदारी, निष्ठा और पारदर्शिता के साथ निर्वहन किया। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती रेखा मोर ने कृषि उत्पन्न बाजार समिति की पूर्व संचालिका के रूप में समाजहित में उल्लेखनीय योगदान दिया। यह परिवार केवल सेवा की बातें नहीं करता, बल्कि सेवा को अपने जीवन का संस्कार मानकर जीता है।
❝ नाम ऊँचा करने के लिए ऊँची आवाज़ नहीं,
ऊँचे संस्कार और नेक इरादे चाहिए। ❞
सामाजिक संगठन के क्षेत्र में भी राजेश बाबूजी का योगदान अत्यंत उल्लेखनीय रहा है। अग्रवाल समाज में उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएँ दीं और वर्तमान में कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में समाज को नई दिशा प्रदान कर रहे हैं। समाज में एकता, सद्भाव, सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण, युवाओं का मार्गदर्शन तथा समाजहित के अनेक कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका सदैव प्रेरणादायी रही है। वे मानते हैं कि समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब सभी लोग एक-दूसरे का हाथ थामकर साथ चलें।उनके जीवन का एक अत्यंत गौरवपूर्ण अध्याय रोटरी क्लब, पाचोरा भी है। पूर्व अध्यक्ष के रूप में उन्होंने रोटरी क्लब को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। उनके नेतृत्वकाल में रोटरी क्लब पाचोरा को 17 प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए, जो उनकी दूरदृष्टि, संगठन क्षमता और समर्पित नेतृत्व का जीवंत प्रमाण हैं। आगे चलकर उन्होंने रोटरी 3030 प्रांत के पूर्व उप-प्रांतपाल के रूप में भी अनेक सामाजिक सेवा प्रकल्पों को गति प्रदान की और सेवा के दायरे को और अधिक व्यापक बनाया।
लेकिन यदि राजेश (बाबूजी) मोर के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी पहचान किसी एक शब्द में करनी हो, तो वह शब्द है—”सेवा”। सेवा उनके लिए केवल एक कार्य नहीं, बल्कि जीवन का संकल्प है। उन्होंने सदैव यह सिद्ध किया है कि समाज में वही व्यक्ति सच्चा सम्मान प्राप्त करता है, जो दूसरों के जीवन में आशा का दीप जलाने का कार्य करता है। रक्तदान सहित विभिन्न सामाजिक कार्यों के माध्यम से समाजसेवा की गौरवशाली परंपरा को उन्होंने निरंतर जीवित रखा है। किसी गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति के लिए रक्त की आवश्यकता हो, किसी गरीब परिवार की सहायता करनी हो, किसी सामाजिक अभियान को सफल बनाना हो अथवा किसी संकटग्रस्त परिवार को संबल देना हो—राजेश बाबूजी बिना किसी प्रचार-प्रसार के सबसे पहले आगे दिखाई देते हैं। उनके लिए समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपना है और यही भावना उन्हें भीड़ से अलग पहचान दिलाती है। ❝ जो अपने लिए नहीं, दूसरों के लिए जीते हैं,
वही लोग इतिहास नहीं, दिलों में लिखे जाते हैं। ❞ समाज में अनेक लोग पद प्राप्त करते हैं, अनेक लोग प्रसिद्धि अर्जित करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो लोगों के दिलों में स्थायी स्थान बना पाते हैं। राजेश बाबूजी उन्हीं विरले व्यक्तित्वों में से एक हैं। लोग अक्सर कहते हैं कि भगवान हर स्थान पर स्वयं उपस्थित नहीं हो सकते, इसलिए उन्होंने अच्छे इंसानों को धरती पर भेजा है। यह बात उनके व्यक्तित्व पर पूरी तरह सार्थक प्रतीत होती है। ज़रूरतमंदों के लिए वे भगवान श्री विठ्ठल की तरह सदैव साथ खड़े रहकर अपना सामाजिक दायित्व निभाते हैं। उनके पास सहायता की अपेक्षा लेकर आने वाला व्यक्ति कभी निराश नहीं लौटता। उनका सहज, सरल और करुणामय स्वभाव ही उनकी सबसे बड़ी पूँजी है।धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, खेल तथा योग जैसे विविध क्षेत्रों में उनकी सक्रिय सहभागिता यह दर्शाती है कि वे केवल एक व्यापारी या सामाजिक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि समाज के सर्वांगीण विकास में विश्वास रखने वाले दूरदर्शी व्यक्तित्व हैं। उनके लिए समाजसेवा किसी संस्था या पद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके जीवन का अभिन्न संस्कार है। वे सदैव लोगों को जोड़ने, नई पीढ़ी को प्रेरित करने और समाज में सकारात्मक वातावरण निर्माण करने का कार्य करते रहे हैं। व्यापार जगत में भी उन्होंने अपनी मेहनत, ईमानदारी और विश्वास के बल पर एक विशिष्ट स्थान बनाया है। वर्षों की अथक मेहनत, पारदर्शी व्यवहार, वचनबद्धता और नैतिक मूल्यों के कारण उन्होंने व्यापारिक क्षेत्र में सम्मान और विश्वास अर्जित किया है। व्यापार उनके लिए केवल आर्थिक प्रगति का माध्यम नहीं, बल्कि विश्वास और प्रतिष्ठा का प्रतीक है। यही कारण है कि व्यापारी समाज में उनका नाम अत्यंत आदर और सम्मान के साथ लिया जाता है। ❝ ईमानदारी की राह कठिन ज़रूर होती है,
लेकिन मंज़िल हमेशा सम्मान से भरी होती है। ❞ राजनीतिक क्षेत्र में भी उनकी अलग और प्रभावशाली पहचान है। पाचोरा-भडगांव विधानसभा क्षेत्र के कार्यसम्राट, हैट्रिक विधायक आदरणीय श्री किशोर आप्पा पाटील के वे अत्यंत निकटवर्ती सहयोगी हैं। वर्षों से वे उनके साथ संगठन, जनसंपर्क तथा सामाजिक समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे हैं। वे उन व्यक्तित्वों में से हैं जो मंच की चमक से अधिक समाजहित के कार्यों को महत्व देते हैं। दूरदर्शिता, सूझबूझ, संगठन कौशल और लोगों को साथ लेकर चलने की उनकी क्षमता के कारण उन्हें पाचोरा की राजनीति का पर्दे के पीछे का कुशल रणनीतिकार कहा जाता है। प्रसिद्धि से दूर रहकर परिणाम देने की उनकी कार्यशैली उन्हें विशिष्ट बनाती है।उनके व्यक्तित्व का सबसे आकर्षक पक्ष यह है कि वे प्रत्येक व्यक्ति से उसके स्वभाव के अनुरूप सहजता से जुड़ जाते हैं। वे न किसी के पद को देखते हैं, न किसी की आर्थिक स्थिति को। उनके लिए हर व्यक्ति सम्मान का अधिकारी है। शायद इसी कारण उनके व्यक्तित्व को देखकर प्रसिद्ध पंक्ति सहज ही स्मरण हो आती है— ❝ “पानी तेरा रंग कैसा… जिसमें मिला है वैसा।” ❞ यही सरलता, यही अपनापन और यही आत्मीयता उन्हें समाज के हर वर्ग में लोकप्रिय बनाती है। उनका विशाल मित्र परिवार इस बात का साक्षी है कि उन्होंने केवल संबंध नहीं बनाए, बल्कि दिलों को जीता है। वे जहाँ भी जाते हैं, वहाँ अपने व्यवहार, मधुर वाणी और स्नेहपूर्ण स्वभाव से एक अलग ही छाप छोड़ जाते हैं। ❝ हज़ारों फूल चाहिए एक माला बनाने के लिए,
हज़ारों दीप चाहिए एक आरती सजाने के लिए;
लेकिन एक नेक इंसान ही काफ़ी होता है,
पूरे समाज को नई दिशा दिखाने के लिए। ❞ आज उनके जन्मदिवस के इस पावन अवसर पर हम सभी मा वैष्णोदेवी के चरणों में यही मंगलकामना करते हैं कि उन्हें उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, सुख, समृद्धि, निरंतर प्रगति, यश, सम्मान तथा जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में नई-नई सफलताएँ प्राप्त हों। उनका समाजसेवा का यह प्रेरणादायी सफर इसी प्रकार निरंतर आगे बढ़ता रहे, उनकी मुस्कान सदैव लोगों के जीवन में आशा और उत्साह का संचार करती रहे तथा उनका स्नेह, मार्गदर्शन और आशीर्वाद समाज को सदैव मिलता रहे। ❝ दुआओँ से महकता रहे आपका हर एक सफ़र,
कामयाबी चूमे कदम, खुशियों से भरा रहे हर पहर।
रहे सलामत आपका यह नेक सफ़र उम्रभर,
यही दुआ है दिल से—हर जन्मदिन हो और भी बेहतर। ❞ आज इस शुभ अवसर पर “झुंज” समाचार पत्र एवं “ध्येय न्यूज” के संपादक श्री संदीप महाजन तथा उनके समस्त परिवार की ओर से आदरणीय श्री राजेश (बाबूजी) मोर जी को जन्मदिन की हार्दिक, अनंत एवं करोड़ों शुभकामनाएँ। माता वैष्णोदेवी से यही प्रार्थना है कि आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, अपार यश और निरंतर प्रगति का प्रकाश सदैव बना रहे। समाजसेवा की आपकी यह अविरल यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनती रहे और आपका स्नेह, सहयोग तथा आशीर्वाद हम सभी को सदैव प्राप्त होता रहे। आदरणीय श्री राजेश (बाबूजी) मोर जी को जन्मदिन की हार्दिक, मंगलमय, अनंत एवं करोड़ों शुभकामनाएँ। प्रभु श्री विठ्ठल की असीम कृपा आप एवं आपके समस्त परिवार पर सदैव बनी रहे। आपका जीवन सेवा, सम्मान, सफलता और खुशियों के नवीन आयाम स्थापित करता रहे—इन्हीं मंगलकामनाओं के साथ पुनः जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!

व्यक्तिमत्त्वाचा सुवर्णोत्सव
आदरणीय श्री राजेश (बाबूजी) मोरे यांना वाढदिवसानिमित्त काव्यांजली
उंच भरारी घेणाऱ्या गरुडाचे तेज, जसे नभामध्ये दाटते;
तसेच तुमच्या कर्तृत्वाचे तेज, आज समाजमनात नांदते.
हास्य तुमचे जणू, पहाटेच्या दवबिंदूंचे निर्मळ सौंदर्य;
सेवेमधुनी फुलविले तुम्ही, आयुष्याचे खरे माधुर्य.
स्वभावात गोडवा, वाणीमध्ये प्रेम;
संकटात धैर्य, कर्तृत्वात नेम.
आपुलकीचा झरा अखंड वाहत राहिला;
म्हणूनच प्रत्येक जीव, तुमच्यावर जिवापाड प्रेम करू लागला.
रक्तदानाच्या प्रत्येक थेंबातून, मानवतेचा सुगंध दरवळला;
गरजवंतांच्या अश्रूंमध्ये, तुमच्या मायेचा विठ्ठल उभा राहिला.
सामाजिक बांधिलकीचा दीप, तुम्ही अखंड तेवत ठेवला;
म्हणून जनमानसात, तुमचा मान अधिकाधिक वाढत गेला.
व्यापारात प्रामाणिकपणा, समाजात स्नेहाचा मान;
कर्तृत्वाने उजळला, तुमचा जीवनप्रवास महान.
अग्रवाल समाज असो, की रोटरीचे कार्य महान;
प्रत्येक ठिकाणी उमटला, तुमच्या नेतृत्वाचा सुवर्ण ठसा अन् सन्मान.
राजकारणात संयम, मैत्रीत अपार जिव्हाळा;
कार्यसम्राट आमदार किशोर आप्पा पाटील यांच्या विश्वासाचा,
तुम्ही खंबीर आधारवड झाला.
पडद्यामागे राहूनही, यशाची शिखरे गाठणारा योद्धा;
असा असतो खरा, समाजहिताचा कर्मयोगी नेता.
तुमच्या हास्यामध्ये, आशेची पहाट फुलते;
तुमच्या सहवासाने, प्रत्येक भेट संस्मरणीय ठरते.
“पाणी तेरा रंग कैसा… जिसमें मिला है वैसा…”
ही ओळ जणू, तुमच्यासाठीच लिहिली गेली;
ज्यांच्याशी मिसळाल, त्यांच्याशी नात्यांची सुवर्णफुले फुलली.
तुमच्या आयुष्याचा प्रत्येक दिवस,
सुगंधित फुलांच्या बहरासारखा फुलत राहो;
यशाच्या प्रत्येक शिखरावर,
तुमच्या कर्तृत्वाचा ध्वज, डौलाने फडकत राहो.
प्रभू श्री विठ्ठलाच्या चरणी, एकच प्रार्थना—
आपल्याला उत्तम आरोग्य, दीर्घायुष्य,
अखंड सुख, समृद्धी, यश, कीर्ती
आणि जनसेवेचे बळ लाभो.
समाजहिताचा हा दीप,
असाच अखंड प्रज्वलित राहो;
तुमच्या प्रेरणादायी कार्याचा प्रकाश,
पुढील अनेक पिढ्यांना दिशा देत राहो.
वाढदिवस हा केवळ वय वाढण्याचा दिवस नसतो;
तो माणुसकी, कर्तृत्व, मैत्री, सेवाभाव
आणि नात्यांच्या श्रीमंतीचा उत्सव असतो.
त्या उत्सवाचे खरे शिल्पकार म्हणजे—
आदरणीय श्री राजेश (बाबूजी) मोरे.
“झुंज” वृत्तपत्र व **”ध्येय न्यूज”**चे संपादक श्री संदीप महाजन तथा समस्त परिवारातर्फे, आदरणीय श्री राजेश (बाबूजी) मोरे यांना वाढदिवसाच्या हार्दिक, मंगलमय व अनंत शुभेच्छा!





























