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  इतिहास की याद – विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर पाचोरा में मशाल रैली का आयोजन تاريخ جي ياد – ورهاڱي جي ويھيڪي ڏينھن تي پاچورا ۾ مشعل ريلي جو اهتمام

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पाचोरा – 14 अगस्त भारत के इतिहास का एक अत्यंत पीड़ादायक और हृदय विदारक दिन है। सन 1947 में भारत का विभाजन हुआ और उससे उत्पन्न हुई भयंकर अशांति, दंगे, हिंसा, जनहानि तथा लाखों लोगों के विस्थापन का घाव आज भी ताज़ा है। इस अमानवीय घटना की स्मृति में, नई पीढ़ी को इससे मिलने वाले ऐतिहासिक सबक से अवगत कराने और विस्थापितों के बलिदान को याद रखने के उद्देश्य से हर वर्ष 14 अगस्त को “विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस” के रूप में मनाया जाता है। इस स्मृति दिवस के अवसर पर पाचोरा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भारतीय सिंधु सभा, पूज्य सिंधी जनरल पंचायत, सिंधी कॉलोनी पाचोरा के संयुक्त तत्वावधान में भव्य मशाल रैली का आयोजन किया गया। देशभक्ति के जोश में और “वंदे मातरम”,

“भारत माता की जय” जैसे नारों की गूंज में यह रैली संपन्न हुई। रैली की शुरुआत भारतीय सिंधु सभा युवा विंग महाराष्ट्र प्रदेश के महामंत्री राकेश पुर्सनाणी और भारतीय जनता पार्टी व्यापारी मोर्चा के जिला अध्यक्ष रमेश वाणी के हाथों मशाल प्रज्वलित करके की गई। यह मशाल स्वतंत्रता के प्रकाश और विभाजन में शहीद हुए लोगों के बलिदान का प्रतीक बनकर आगे बढ़ी। रैली की शुरुआत सिंधी नवजवान सेवा मंडल, शिव मंदिर से हुई और मार्गक्रमण करते हुए यह साईं

झूलेलाल भगवान मंदिर, सिंधी कॉलोनी पाचोरा पहुंची। वहां भारत माता और सिंधी समाज के कुल देवता भगवान झूलेलाल की प्रतिमा के सामने पूजा-अर्चना और अभिषेक किया गया। इसके बाद रमेश वाणी और श्याम वाजपेयी ने उपस्थित नागरिकों को 14 अगस्त विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का ऐतिहासिक महत्व समझाया। उन्होंने विभाजन के समय की भयावह परिस्थितियों, उसमें लाखों लोगों की जान जाने, लाखों परिवारों के विस्थापन और सिंधी समाज सहित अन्य विस्थापित समुदायों द्वारा झेली गई कठिनाइयों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस दिन को याद करने का उद्देश्य केवल अतीत के दुख को स्मरण करना नहीं है, बल्कि एकता, भाईचारे और देश की अखंडता का महत्व नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। इस रैली में भारतीय सिंधु सभा अध्यक्ष अनिल चंदनाणी, रैली के कार्याध्यक्ष एड. राजेंद्र डी. वासवाणी, मीडिया प्रभारी जितेश नागराणी की विशेष उपस्थिति रही। साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के श्याम वाजपेयी, विक्की ऐशवाणी, जगदीश पाटिल, दीपक माने, अमोल नाथ, प्रदीप पाटिल, योगेश ठाकुर, उमेश माली ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूज्य सिंधी जनरल पंचायत के मोटूमल नागराणी, गुलाब पंजवाणी, रमेश शामनाणी, सतीश सर शामनाणी, सुनील सर शामनाणी भी सक्रिय रूप से उपस्थित थे। सामाजिक कार्यकर्ता हरी वासवाणी, राजेश चंदनाणी, जयराम ऐशवाणी, वरंद पुर्सनाणी, भारत वाधवाणी, राम शामनाणी, बंटी शामनाणी, आकाश केसवाणी, योगेश वाधवाणी, जय ईसराणी, लक्की रत्नाणी समेत सिंधी समाज के अनेक गणमान्य नागरिक और युवा कार्यकर्ता मौजूद थे। रैली के आयोजन और प्रबंधन की जिम्मेदारी राकेश पुर्सनाणी व एड. राजेंद्र डी. वासवाणी ने बखूबी निभाई। मार्ग में रैली ने देशभक्ति के नारों से वातावरण को गूंजा दिया। नागरिकों ने रैली का स्वागत उत्साह से किया, जबकि कई लोगों ने सड़क के किनारे खड़े होकर देशभक्ति का जयघोष किया। यह मशाल रैली केवल एक दिन का कार्यक्रम न होकर, एक ऐतिहासिक संदेशवाहक साबित हुई। विभाजन से आए सिंधी समाज ने अपने परिश्रम, संस्कृति, व्यापार कौशल और सामाजिक कार्यों से देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, यह इस रैली से स्पष्ट हुआ। विभाजन की पीड़ा पीढ़ी दर पीढ़ी स्मरण में रहे और भविष्य में ऐसी त्रासदी फिर न हो, इसके लिए नागरिकों को जागरूक करने का उद्देश्य इस कार्यक्रम से सफलतापूर्वक पूरा हुआ। 14 अगस्त का दिन भारतीय इतिहास के पन्नों में भले ही काले अक्षरों में दर्ज हो, लेकिन यह दिन हमें एकता, सामूहिक साहस और दृढ़ निश्चय की शिक्षा भी देता है। पाचोरा की इस मशाल रैली ने न केवल उस दुखद घटना को याद किया, बल्कि यह देश की एकता और सांस्कृतिक सौहार्द का प्रतीक बनकर आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करने वाली भी साबित हुई।

تاريخ جي ياد – ورهاڱي
جي وڀييشڪا سمرتي ڏهاڙي تي پاچورا ۾ مشعل ريلي جو آيوجن
14 – آگسٽ، ڀارت جي تاريخ ۾ هڪ تمام دردناڪ ۽ دل ڏکائيندڙ ڏينهن آهي۔ سن 1947 ۾ ڀارت جو ورهاڱو ٿيو، ۽ ان سان گڏ آيل خوفناڪ افراتفري، دنگا، هنساءُ، جان ۽ مال جو وڏو نقصان ۽ لکين ماڻهن جو بي گهر ٿيڻ جو زخم اڄ به تازو آهي۔ ان امانوي واقعي جي ياد ۾، نئين پيڙهي کي تاريخ جا سبق سمجهائڻ ۽ بي گهر ٿيلن جي قرباني کي ياد رکڻ لاءِ، هر سال 14 آگسٽ کي “ورهاڱي جي وڀييشڪا سمرتي ڏهاڙو” طور ملهائبو آهي۔ پاچورا ۾ هن سمرتي ڏهاڙي جي موقعي تي، راشٽريه سويئم سيوڪ سنگھ، ڀارتيه سنڌو سڀا، پوڄي سنڌي جنرل پنچائت، سنڌي ڪالوني پاچورا جي گڏيل ميزباني هيٺ هڪ ڀव्य مشعل ريلي جو آيوجن ٿيو۔ ديس ڀڪتي جي جوش ۾، “وندي ماترم” ۽ “ڀارت ماتا جي جئي” جا نعرا گونجندا رهيا، ۽ ريلي شان سان نڪتي۔ ريلي جي شروعات ڀارتيه سنڌو سڀا يووا وِنگ مهاراشٽر پرديش جي مهامنتري شري راڪيش پُرسناڻي ۽ ڀاجپا وياپاري مورچا جي ضلع صدر شري رمیش واني جي هٿن مشعل ٻاري ڪري ٿي۔ هي مشعل، آزادي جي روشني ۽ ورهاڱي ۾ شهيد ٿيل ماڻهن جي قرباني جو علامت بڻجي، شهر ۾ اڳتي وڌي۔ ريلي، سنڌي نوجوان سيوه منڊل شِو مندر تان شروع ٿي، سائين جھوليلال ڀڳوان مندر، سنڌي ڪالوني پاچورا تائين پهتي۔ اتي ڀارت ماتا ۽ سنڌي سماج جي ڪل ديوتا ڀڳوان جھوليلال جي مورتي آڏو پوڄا-ارجنا ۽ اڀشيڪ ٿيو۔ پوءِ رمیش واني ۽ شيام واجپئي، موجود ماڻهن کي 14 آگسٽ ورهاڱي جي وڀييشڪا سمرتي ڏهاڙي جو تاريخي پس منظر سمجهرايو۔ ورهاڱي واري وقت جي خوفناڪ حالتن، لکين ماڻهن جي جان وڃڻ، لکين گهر بار ڇڏيندڙ بي گهر ٿيڻ، ۽ خاص طور تي سنڌي سماج سميت ٻين ڪميونٽيز جي تڪليفن بابت وڌيڪ ڄاڻ ڏني۔ هنن اهو به چيو ته، هي ڏينهن ياد ڪرڻ جو مقصد صرف پراڻن ڏکن کي ورجائڻ ناهي، پر ايڪتا، ڀائچاري ۽ ديس جي اَخندتا جي اهميت نئين پيڙهي تائين پهچائڻ آهي۔ هن ريلي ۾ ڀارتيه سنڌو سڀا جي صدر انيل چندناني، ريلي جي ڪارياڌيڪش ايڊ. راجندَر ڊي. واسواڻي، ميڊيا پرڀاري جيتيش ناگراني خاص موجود هئا۔ راشٽريه سويئم سيوڪ سنگھ طرفان شيام واجپئي، وِڪّي ايشواڻي، جگديش پاٽيل، ديپڪ ماني، امول ناتھ، پرديپ پاٽيل، يوگيش ٺاڪر، اوَميش مالي به جوش سان حصو ورتو۔ پوڄي سنڌي جنرل پنچائت طرفان موٽومل ناگراني، گلاب پنجواڻي، رمیش شامناڻي، ستيش سر شامناڻي، سُنيُل سر شامناڻي، سماجي ڪارڪن هري واسواڻي، راجيش چندناني، جيرام ايشواڻي، ورند پُرسناڻي، ڀارت وادهاڻي، رام شامناڻي، بُنٽي شامناڻي، آڪاش کيسواڻي، يوگيش وادهاڻي، جَي ايسراڻي، لڪي رتناڻي سميت سنڌي سماج جا ڪيترائي معزز ۽ نوجوان ڪارڪن موجود هئا۔ ريلي جي آيوجن ۽ پرَبَند جي ذميواري شري راڪيش پُرسناڻي ۽ ايڊ. راجندَر ڊي. واسواڻي خوب نڀائي۔ شهر ۾ ريلي ديس ڀڪتي جي نعرا سان ماحول ۾ جوش ڀري ڇڏيو، ماڻهن ريلي جو ڀرپور استقبال ڪيو، ۽ رستي تي بيٺل ڪيترن ماڻهن ديس ڀڪتي جا نعرا هنيا۔ هي مشعل ريلي صرف هڪ ڏينهن جو پروگرام نه هو، پر هڪ تاريخي پيغام پهچائڻ واري بڻجي۔ ورهاڱي کان پوءِ سنڌي سماج، پنهنجي محنت، ثقافت، واپار جي هنر ۽ سماجي حصي سان ديس جي ترقي ۾ اهم ڪردار ادا ڪري رهيو آهي، اهو پيغام به هن ريلي مان صاف ظاهر ٿيو۔ ورهاڱي جي پيڙا پيڙهيءَ در پيڙهيءَ تائين ياد رهي، ۽ اهڙي تراسدي ٻيهر نه ٿئي، ان لاءِ جاڳرتا پيدا ڪرڻ ۾ هي آيوجن ڪامياب ٿيو۔ 14 آگسٽ ڀلي ڀارت جي تاريخ ۾ ڪارا اکرن سان لکيل هجي، پر هي ڏينهن سيکاري ٿو ته ايڪتا، گڏيل بهادري ۽ مضبوط ارادي سان هر مشڪل کي مات ڏئي سگهجي ٿي۔ پاچورا جي مشعل ريلي نه صرف انهيءَ ڏکدائِي واقعي کي ياد ڪيو، پر ديس جي ايڪتا ۽ ثقافتي سَوهَرد جو علامت بڻجي، ايندڙ پيڙهين لاءِ الهام ڏيندڙ به ثابت ٿي۔

इतिहासाची आठवण – फाळणीचा दिवस : कधीही न विसरणारा जखमेचा वेदनादायक ठसा      —–                                            पाचोरा – १४ ऑगस्ट १९४७ — ही तारीख भारतीय इतिहासाच्या पानांवर केवळ स्वातंत्र्याच्या पूर्वसंध्येची नाही, तर भारतीय जनतेच्या हृदयात कायमचा ठसलेला असा दु:खाचा, रुदनाचा आणि रक्ताचा दिवस आहे. ही ती रात्र होती ज्या रात्री इंग्रजांनी सत्ता हस्तांतराच्या नावाखाली भारताची छाती फाडली. शतकानुशतके एकत्र राहणाऱ्या भावांमध्ये धर्माच्या नावाने, राजकीय खुर्च्यांच्या हव्यासाने, आणि परकीय षडयंत्रांनी जखमा खोल केल्या. अंग्रेजांच्या २०० वर्षांच्या अत्याचारानंतर भारत स्वतंत्र होत होता, पण त्या स्वातंत्र्याच्या साखळ्यांसोबत रक्ताने भिजलेली एक रेषाही आपल्या नकाशावर कोरली गेली — भारत आणि पाकिस्तान अशी दोन राष्ट्रं उभी करण्यात आली. पण त्या रेषेने फक्त जमीनच नाही, तर मनं, माती, नाती, संस्कृती आणि भविष्य सुद्धा तोडलं. एका रात्रीत लाखो लोक परके झाले, आपली घरं, शिवारं, बाजारपेठा, मंदिरे, गुरुद्वारे, समाधी — सर्व काही मागे सोडून जीव वाचवण्यासाठी त्यांनी पळ काढला. सिंध — ज्याची ओळख सहिष्णुता, व्यापारकौशल्य, सांस्कृतिक समृद्धी आणि झूलेलाल यांच्या कृपेने सजलेल्या श्रद्धेने होती — त्या भूमीतील हिंदू बांधवांना सर्व काही गमवून भारतात पळावे लागले. जन्मभूमी मागे राहिली, बालपणाच्या गल्ल्या, आईवडिलांचे घर, पिढ्यानपिढ्या चालत आलेला व्यवसाय — सगळं क्षणात गमावलं. जे वाचले त्यांनी केवळ अंगावरचे कपडे आणि आठवणींचा ओझा घेऊन अनोळखी देशाच्या नव्या कोपऱ्यात पाय ठेवला. रस्त्यात दरोडे, हत्याकांडे, स्त्रियांचा अवमान, मुलांच्या डोळ्यासमोर होणारे हत्याकांड — या सर्वांचा सामना त्यांनी केला. पंजाबातही तीच कथा. सिख आणि पंजाबी हिंदू बांधवांना आपली संपन्न शेती, गुरुद्वारे, हक्काची घरं सोडून भारतात पळावं लागलं. पाकिस्तानच्या भागातील लाहोर, रावलपिंडी, मुलतान या शहरांतले हजारो सिख-पंजाबी एका रात्रीत बेघर झाले. त्यांनी सीमारेषा ओलांडताना प्रचंड हिंसा पाहिली — रेल्वेगाड्यांमधून प्रेतं आणली जात होती, रस्त्यांवर रक्ताचे डोह झाले होते. फाळणीचा घाव केवळ सिंधी आणि पंजाबी सिखांवरच नव्हता. बंगालच्या पूर्व भागात हिंदू-मुस्लिम दोघांच्याही जीवनात उलथापालथ झाली. उत्तर-पश्चिमी सीमावर्ती प्रांत, बलुचिस्तान या भागात राहणारे अनेक हिंदू, शीख, तसेच काही मुस्लिम कुटुंबंही विस्थापित झाली. आपापल्या धर्माच्या लोकांसोबत सुरक्षित स्थळी जाण्यासाठी त्यांनी जिवाची बाजी लावली. एकूण १.५ कोटी लोकांना आपल्या जन्मगावातून हुसकावून लावले गेले. अंदाजे १० ते १५ लाख लोकांचा जीव गेला. या आकड्यांच्या मागे असंख्य विधवा, पोरके झालेले बालक, उद्ध्वस्त झालेले कुटुंब आणि आयुष्यभर न भरून येणाऱ्या जखमा दडलेल्या होत्या. तरीही, हे विस्थापित लोक भारतात आल्यावर हातावर हात ठेवून बसले नाहीत. त्यांनी नव्या भूमीत परिश्रमाने आपलं आयुष्य पुन्हा उभं केलं. सिंधी समाजाने आपली व्यापारी वृत्ती, कष्टाळूपणा आणि संस्कृतीची ओळख जपून भारतातील अनेक राज्यांमध्ये व्यवसाय उभारला. शिक्षण, व्यापार, समाजसेवा, उद्योग अशा प्रत्येक क्षेत्रात त्यांनी भारताला आपलं सर्वोत्तम दिलं. हातात भांडवल नव्हतं, पण मनात आत्मविश्वास आणि पिढ्यानपिढ्या जोपासलेलं अनुभवसंपन्न ज्ञान होतं. सिख आणि पंजाबी बांधवांनी भारताच्या शेतीला नवी ताकद दिली. हरितक्रांतीच्या वेळी पंजाब आणि हरियाण्यातील शेतकऱ्यांनी देशाचं अन्नधान्य उत्पादन वाढवून अन्नसुरक्षेचं कवच दिलं. उद्योग, सेना, क्रीडा, संगीत या क्षेत्रांतही त्यांनी देशाचं नाव उज्वल केलं. फाळणीने जगाला दाखवून दिलं की धर्माच्या नावाने रेषा आखणं म्हणजे रक्तपाताचं दार उघडणं. त्या वेळी धार्मिक उन्माद, राजकीय सत्तेची लालसा आणि परकीय शक्तींचं षडयंत्र यांनी एकत्र येऊन किती अमानुष परिणाम घडवून आणू शकतात, हे इतिहासाने सिद्ध केलं. त्यामुळे आजही समाजात नफरतची बी पेरणाऱ्या प्रवृत्तींना ओळखणं आणि थांबवणं ही आपली जबाबदारी आहे. १४ ऑगस्टचा “विभाजन विभीषिका स्मृती दिवस” हा केवळ स्मरणाचा नाही, तर चेतनेचा दिवस आहे. हा दिवस आपल्याला सांगतो — “भूतकाळ विसरू नका, अन्यथा इतिहास पुन्हा स्वतःची पुनरावृत्ती करेल.” त्या दिवशी झालेल्या बलिदानांचा सन्मान करणे, पुढच्या पिढ्यांना एकतेचं, सहिष्णुतेचं आणि सामूहिक साहसाचं मूल्य समजावून सांगणे, हे या दिवसाचं उद्दिष्ट आहे. फाळणीच्या जखमा आजही अनेक कुटुंबांच्या आठवणीत ताज्या आहेत. पण त्या जखमांनी एक शिकवण दिली — परिस्थिती कितीही प्रतिकूल असो, धैर्य, परिश्रम आणि एकतेने उभं राहता येतं. सिंधी, पंजाबी, बंगाली आणि इतर विस्थापित समाजांनी याच धैर्याने भारताच्या उभारणीत आपलं स्थान निर्माण केलं. १४ ऑगस्ट हा दिवस भारताच्या इतिहासातील काळा अध्याय आहे, पण त्यातूनच प्रकाशाची किरणंही फुटतात. त्या वेदनांच्या स्मरणातून आपण एकतेचा, बंधुत्वाचा आणि धर्मनिरपेक्षतेचा मार्ग स्वीकारू या. कोणत्याही परिस्थितीत नफरतची राजकारणं उभी राहू नयेत, यासाठी सजग राहणं हीच खरी श्रद्धांजली ठरेल. आज, या स्मृतीदिनी आपण सर्वांनी मनापासून शपथ घ्यायला हवी — “आपल्या देशाच्या एकतेला, स्वातंत्र्याला आणि अखंडतेला कुणाच्याही हातून धक्का लागू देणार नाही, आणि कधीही फाळणीसारखा शाप पुन्हा या भूमीवर येऊ देणार नाही.”

भव्य तिरंगा रॅलीने पाचोराचा परिसर देशभक्तीच्या जयघोषाने दणाणला

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पाचोरा – शहरात आज सकाळी देशभक्तीचा अद्वितीय जल्लोष पाहायला मिळाला. भारतीय जनता पक्षाच्या वतीने “ऑपरेशन सिंदूर”च्या ऐतिहासिक यशाच्या निमित्ताने तसेच भारतीय स्वातंत्र्य दिनाचे औचित्य साधून काढण्यात आलेली भव्य तिरंगा रॅली शहरभरात उत्साह, आनंद आणि अभिमानाची लहर निर्माण करून गेली. पहलगाम येथे घडलेल्या भीषण दहशतवादी हल्ल्यात 26 निर्दोष नागरिकांचा बळी गेल्यानंतर भारतीय लष्कराच्या शूर जवानांनी आणि भारत सरकारने अत्यंत धाडसाने “ऑपरेशन सिंदूर” ही मोहिम राबवून पाकिस्तानला ठोस प्रत्युत्तर दिले. या मोहिमेत अनेक जवानांनी शौर्याने लढत वीरमरण पत्करले. त्यांना आदरांजली वाहण्यासाठी आणि विजयाचा उत्सव साजरा करण्यासाठी भारतभर भाजपाच्या वतीने भव्य तिरंगा रॅलीचे आयोजन करण्यात आले. पाचोरा येथील तिरंगा रॅलीची सुरुवात एम. एम. महाविद्यालयाच्या प्रवेशद्वारापासून सकाळी नेमक्या साडेआठ वाजता झाली. सुरुवातीपासूनच रॅलीत उत्साह ओसंडून वाहत होता. रॅलीमध्ये एम. एम. महाविद्यालय, श्री गो. से. हायस्कूल, कै. पी. के. शिंदे विद्यालय, नवीन माध्यमिक विद्यालय अशा शहरातील प्रमुख शाळा-महाविद्यालयांतील विद्यार्थी-विद्यार्थिनी, शिक्षक-शिक्षकेतर कर्मचारी, पालक, सामाजिक, राजकीय, शैक्षणिक क्षेत्रातील मान्यवर मोठ्या संख्येने सहभागी झाले. गणवेशातील विद्यार्थी-विद्यार्थिनी, हातात तिरंगा, चेहऱ्यावर देशभक्तीचा उजाळा आणि घोषणांनी भारावलेले वातावरण पाहून रॅली एक वेगळेच दृश्य साकार करत होती. रॅलीला सुरुवात होताच “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्”, “वीर जवान तुझे सलाम” अशा घोषणांनी परिसर दणाणून गेला. शहरातील नागरिकांनी रॅलीला मोठा प्रतिसाद देत रस्त्याच्या कडेला उभे राहून सहभागींचे स्वागत केले. धर्मवीर छत्रपती संभाजी चौक, भडगाव रेल्वे भुयारी मार्ग, छत्रपती शिवाजी महाराज चौक असा मार्गक्रमण करत रॅली पुढे सरकली. रॅलीदरम्यान वातावरणात तिरंग्यांची उधळण आणि देशभक्तीपर गीतांचा गजर सुरू होता. अनेक विद्यार्थिनींनी भारत मातेची वेशभूषा परिधान केली होती, ज्यामुळे रॅलीत एक वेगळाच रंग भरला. रॅलीचे अंतिम ठिकाण होते हुतात्मा स्मारक. तिथे पोहोचल्यावर भारत मातेच्या प्रतिमेचे पूजन करण्यात आले. पूजनाचा मान पाचोरा तालुका सहकारी शिक्षण संस्थेचे चेअरमन नानासाहेब संजय वाघ, पिटीसीचे व्हाईस चेअरमन नानासाहेब विलास जोशी, गिरणाई पतसंस्थेचे चेअरमन सतीशबापू शिंदे, सतीशआप्पा चौधरी, किशोर संचेती, भाजप शहराध्यक्ष दीपक माने, व्यापारी आघाडीचे जिल्हाध्यक्ष कांतीलालभाऊ जैन, रमेशशेठ वाणी, अनिल पाटील, डॉ. अनिल देशमुख, वीरेंद्र चौधरी, वासुदेवआण्णा महाजन, अशोक मोरे, विठ्ठल महाजन तसेच इतर सामाजिक, राजकीय, शैक्षणिक, धार्मिक क्षेत्रातील मान्यवरांच्या हस्ते करण्यात आले. पूजनावेळी उपस्थित सर्वांनी हुतात्म्यांना आदरांजली वाहिली आणि त्यांच्या बलिदानाचे स्मरण केले. रॅलीच्या आयोजनात शिस्त आणि नियोजन यांचा उत्तम मिलाफ पाहायला मिळाला. संपूर्ण मार्गावर पोलिसांनी चौख बंदोबस्त ठेवला होता. पोलीस निरीक्षक राहुल पवार साहेब यांच्या मार्गदर्शनाखाली सुरक्षा व्यवस्था सुरळीत पार पडली. पत्रकार, विविध माध्यमांचे प्रतिनिधी, स्थानिक छायाचित्रकार रॅलीचे क्षण टिपण्यासाठी हजर होते. ही रॅली केवळ “ऑपरेशन सिंदूर”च्या विजयाचा उत्सव नव्हती, तर ती भारताच्या ऐक्याची, शौर्याची आणि देशभक्तीची सशक्त घोषणा होती. शाळा-महाविद्यालयांतील तरुणाईपासून ते ज्येष्ठ नागरिकांपर्यंत सर्वच वयोगटातील लोकांनी उत्स्फूर्त सहभाग देऊन एकतेचा संदेश दिला. सहभागी विद्यार्थ्यांनी व पालकांनी एकमुखाने सांगितले की अशा उपक्रमांमुळे देशाविषयीची निष्ठा आणि जबाबदारीची जाणीव वाढते. संपूर्ण शहरातून आज एकच संदेश गेला – “जवानांच्या त्यागाचे स्मरण ठेवून आपण सर्वजण देशाच्या सुरक्षेसाठी कटिबद्ध राहू.” रॅलीच्या यशस्वी आयोजनामुळे पाचोरा शहरात आजचा दिवस ऐतिहासिक ठरला. तिरंग्याच्या साक्षीने, घोषणांच्या गजरात आणि देशभक्तीच्या लाटेत ही रॅली हुतात्मा स्मारकात संपन्न झाली, मात्र तिचा उत्साह आणि अभिमान नागरिकांच्या मनात दीर्घकाळ घर करून राहील.

आज दि.15/08/2025 चे सर्व राशीचे भविष्य व शुभ अंक व रंग

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मेष :
दिवस उत्साहदायक आहे. नवीन कामास प्रारंभ करता येईल. कुटुंबात सौख्य लाभेल. आरोग्य सुधारेल.
शुभ रंग : तांबडा

वृषभ :
मनातील चिंता दूर होतील. आर्थिक व्यवहारात लाभ होईल. जुनी कामे मार्गी लागतील.
शुभ रंग : क्रीम

मिथुन :
महत्त्वाच्या व्यक्तींची साथ लाभेल. सामाजिक कामातून सन्मान मिळेल. कामात समाधान लाभेल.
शुभ रंग : हिरवा

कर्क :
कुटुंबात शांतता नांदेल. जुन्या अडचणी दूर होतील. कामात यशाची शक्यता आहे.
शुभ रंग : चंदेरी

सिंह :
आत्मविश्वास वाढेल. मान-सन्मान प्राप्त होईल. नवे कार्य हाती घ्याल.
शुभ रंग : केशरी

कन्या :
आरोग्याची काळजी घ्या. काही निर्णय थांबवलेले चांगले. जुन्या मैत्रीचे पुनरुज्जीवन होईल.
शुभ रंग : फिकट निळा

तूळ :
व्यवसायात यश मिळेल. कौटुंबिक सौख्य राहील. गुंतवणुकीत लाभ संभवतो.
शुभ रंग : गुलाबी

वृश्चिक :
जबाबदारीची जाणीव ठेवा. समाजात सन्मान वाढेल. एखादी योजना यशस्वी ठरेल.
शुभ रंग : जांभळा

धनु :
धार्मिक व आध्यात्मिक कार्यात सहभाग लाभेल. घरातील वातावरण प्रसन्न राहील.
शुभ रंग : पिवळा

मकर :
खर्चावर नियंत्रण ठेवा. निर्णयात घाई करू नका. शांत राहणे हितकारक.
शुभ रंग : करडा

कुंभ :
जुनी इच्छा पूर्ण होण्याची शक्यता. घरातील निर्णय तुमच्या बाजूने होतील.
शुभ रंग : निळसर

मीन :
शिक्षण, स्पर्धा व प्रवासासाठी उत्तम दिवस. नवीन ओळखी लाभदायक ठरतील.
शुभ रंग : फिकट पिवळा

वाचकांनी वरील भविष्यवाणीचा अर्थ अचूक भविष्यवाणी म्हणून न लावता केवळ आत्मपरीक्षण आणि सकारात्मक प्रेरणा म्हणून घ्यावा.

स्वातंत्र्यसैनिकांचा वारसा जपणारे कै.एस. टी. अहिरे सर यांचे प्रथम पुण्यस्मरण

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पाचोरा – कै. तोताराम गणपत अहिरे हे स्वतः स्वातंत्र्यसैनिक होते. देशाच्या स्वातंत्र्यलढ्यात त्यांनी योगदान दिले आणि आयुष्यभर देशप्रेम, प्रामाणिकपणा व सामाजिक बांधिलकी यांचे मोल जपले. हाच आदर्श त्यांच्या कुटुंबीयांनी आणि विशेषतः त्यांचे सुपुत्र कै. संभाजी तोताराम अहिरे (एस. टी. अहिरे सर) यांनी आयुष्यभर पाळला. पाचोरा येथील श्री. गो. से. हायस्कूलचे मा. मुख्याध्यापक म्हणून कार्यरत असताना, तसेच निवृत्तीनंतरही त्यांनी शिक्षणसेवा, समाजसेवा आणि संस्थाभक्ती या तीनही क्षेत्रांत आपला ठसा उमटवला. त्यांचे प्रथम पुण्यस्मरण अर्थात वर्षश्राद्ध शनिवार, दि. १६ ऑगस्ट २०२५ रोजी सकाळी १० वाजता महालपुरे मंगल कार्यालय, भडगाव रोड, पाचोरा येथे होणार आहे. या निमित्ताने ‘अनाथांची माय’ म्हणून ओळखल्या जाणाऱ्या लक्ष्मीमाता वारकरी शिक्षण संस्थेच्या पाचोरा येथील ह.भ.प. सौ. सुनीताताई पाटील यांच्या कीर्तनाचा विशेष कार्यक्रम आयोजित केला आहे. या कार्यक्रमाचे औचित्य साधून त्यांच्या आयुष्याचा प्रवास, शिक्षण क्षेत्रातील कामगिरी आणि स्वातंत्र्यसैनिकांचा वारसा याबद्दल सविस्तरपणे आठवणी जागवल्या जातील. कै. संभाजी तोताराम अहिरे यांचा जन्म स्वातंत्र्यसैनिक कुटुंबात झाल्याने त्यांच्यामध्ये लहानपणापासूनच देशभक्ती, निष्ठा आणि प्रामाणिकपणाचे संस्कार घट्ट रुजले. वडील कै. तोताराम गणपत अहिरे यांनी स्वातंत्र्यलढ्यात सक्रिय सहभाग घेतला होता. त्या काळातील त्यांची जिद्द आणि देशासाठीची झटण्याची वृत्ती मुलांच्या मनावर ठसली होती. हेच संस्कार पुढे संभाजी अहिरे यांच्या शिक्षकजीवनात, सामाजिक कार्यात आणि संस्थेसाठी केलेल्या निष्ठावंत सेवेत प्रकर्षाने दिसून आले. श्री. गो. से. हायस्कूल, पाचोरा येथे मुख्याध्यापक पदावर कार्यरत असताना त्यांनी शिक्षक म्हणूनच नव्हे, तर मार्गदर्शक, पालकवत व्यक्तिमत्त्व म्हणून विद्यार्थ्यांमध्ये आपली वेगळी ओळख निर्माण केली. विद्यार्थ्यांच्या शैक्षणिक प्रगतीसोबतच त्यांच्या चारित्र्य घडविण्यावर त्यांनी नेहमी भर दिला. ग्रामीण भागातील विद्यार्थ्यांना उत्तम शिक्षण मिळावे, त्यांच्या अडचणी सोडवल्या जाव्यात आणि शिक्षणाची गोडी वाढावी यासाठी त्यांनी विविध शैक्षणिक उपक्रम राबवले. अनेक विद्यार्थ्यांच्या शिक्षणाची जबाबदारी स्वतः उचलून त्यांनी खऱ्या अर्थाने ‘विद्यार्थ्यांचे हित’ हेच आपले ध्येय मानले. मुख्याध्यापक म्हणून त्यांच्या कार्यकाळात शाळा व संस्थेच्या प्रगतीसाठी त्यांनी सातत्याने प्रयत्न केले. संस्थेच्या भौतिक सुविधा वाढविणे, शैक्षणिक निकाल उंचावणे, शिक्षक व कर्मचाऱ्यांमध्ये टीमवर्क निर्माण करणे या सर्व बाबींमध्ये त्यांनी नेतृत्वाची भूमिका निभावली. संस्थेतील शिक्षक-कर्मचाऱ्यांच्या हक्कांबाबत ते सदैव जागरूक राहिले आणि त्यांचे प्रश्न सोडविण्यासाठी आवश्यक त्या पातळीवर प्रयत्न करत राहिले. कै. संभाजी अहिरे यांची संस्थेप्रती असलेली निष्ठा आयुष्याच्या शेवटच्या श्वासापर्यंत कायम राहिली. संस्था चालक स्वातंत्र्यसैनिक स्वर्गीय दादासाहेब आर. एस. थेपडे, स्व. आप्पासाहेब ओ. ना. वाघ आणि वाघ परिवाराशी त्यांचे अत्यंत जिव्हाळ्याचे संबंध होते. संस्थेच्या हितासाठी त्यांनी घेतलेल्या भूमिकेत कधीही ढळ ढळ झाली नाही. वाघ परिवाराच्या शैक्षणिक आणि सामाजिक कार्याच्या ध्येयाशी ते घट्ट जोडले गेले होते. त्यांच्या या निष्ठेमुळे आणि प्रामाणिक सेवेमुळे ते संस्थेच्या इतिहासात सदैव स्मरणात राहतील. त्यांच्या कार्याचा प्रभाव केवळ शाळेपुरता मर्यादित नव्हता. समाजातील अनेक उपक्रम, सांस्कृतिक कार्यक्रम, शैक्षणिक संमेलने यामध्ये त्यांनी सक्रीय सहभाग घेतला. विद्यार्थ्यांना केवळ पुस्तकी ज्ञान न देता, जीवनमूल्यांची शिकवण देणे हे त्यांचे मोठे वैशिष्ट्य होते. ग्रामीण व गरीब विद्यार्थ्यांना शिक्षणात मागे पडू न देता त्यांना संधी देण्यासाठी ते सदैव तत्पर असत. त्यांच्या पश्चात पत्नी गं.भा. सुनंदा संभाजी अहिरे, पुत्र नितीन संभाजी अहिरे, संदीप संभाजी अहिरे, श्रीकांत संभाजी अहिरे तसेच प्रशांत दत्तात्रय अहिरे हे कुटुंबीय आहेत. कुटुंबीयांनी त्यांच्या पुण्यस्मरणानिमित्त समाजासाठी काहीतरी चांगले कार्य घडावे या उद्देशाने कीर्तन कार्यक्रमाचे आयोजन केले आहे. ह.भ.प. सौ. सुनीताताई पाटील यांच्या ओजस्वी कीर्तनातून श्रोत्यांना सामाजिक, नैतिक आणि आध्यात्मिक संदेश मिळणार आहे. कार्यक्रमाचे ठिकाण — महालपुरे मंगल कार्यालय, भडगाव रोड, पाचोरा — हे देखील त्यांच्या आयुष्याशी जोडलेले स्थान आहे. त्यांनी पाचोऱ्याच्या सामाजिक-सांस्कृतिक जीवनात जे योगदान दिले ते इथल्या प्रत्येक नागरिकाला माहीत आहे. त्यामुळे हा कार्यक्रम केवळ कौटुंबिक स्मरणरंजन न राहता, संपूर्ण शहर व परिसरासाठी आदर्श व्यक्तीची आठवण करून देणारा ठरणार आहे. कै. संभाजी तोताराम अहिरे यांचे जीवन हे स्वातंत्र्यसैनिकांच्या वारशाची जपणूक करत शिक्षण व समाजसेवेची साधना करणारे होते. त्यांचे प्रामाणिकपणा, निष्ठा, विद्यार्थ्यांवरील प्रेम, संस्थेसाठीची बांधिलकी आणि जीवनभराचे कार्य हे पुढील पिढ्यांसाठी प्रेरणादायी आहे. त्यांच्या कार्यातून आपण सर्वांनी शिकण्यासारखे म्हणजे — पद कोणतेही असो, कार्य निष्ठेने आणि प्रामाणिकपणे केल्यास त्याचा ठसा काळाच्या पटलावर उमटतो. १६ ऑगस्ट २०२५ रोजी होणारे हे प्रथम पुण्यस्मरण सोहळा त्यांच्या स्मृतींना अभिवादन करणारा, त्यांच्या कार्याचा गौरव करणारा आणि समाजाला एकत्र आणणारा ठरणार आहे. अशा व्यक्तींची कार्ये, विचार आणि निष्ठा जोपर्यंत आपल्यामध्ये जिवंत राहतात, तोपर्यंत ते खऱ्या अर्थाने अमर राहतात. कै. संभाजी तोताराम अहिरे यांचे कार्य आणि विचार हेच त्यांच्या स्मृतीचे खरे स्मारक आहे, जे पुढील पिढ्यांना सदैव प्रेरणा देत राहील.

प्राथमिक शिक्षकांच्या पारोळा सोसायटीचा आदर्श निर्णय — मयत कर्मचाऱ्याच्या पत्नीला केवळ दहा दिवसांतच अनुकंपा तत्वावर नोकरी आदेश

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पारोळा  — सहानुभूती, तत्परता आणि संवेदनशीलतेचा अनोखा नमुना घालून देत जळगाव जिल्हा प्राथमिक शिक्षकांची सहकारी पतपेढी, मुख्य कार्यालय पारोळा यांनी एक आदर्श निर्माण केला आहे. पतपेढीचे कार्यरत कर्मचारी कै. प्रदीप वसंत वाघ यांच्या अकाली निधनानंतर केवळ दहा दिवसांतच त्यांच्या पत्नी गृहिणी वर्षा प्रदीप वाघ यांना अनुकंपा तत्वावर नोकरीचा आदेश देण्यात आला. हा निर्णय केवळ कागदोपत्री न राहता प्रत्यक्ष अंमलात आणत, सोसायटीने सामाजिक बांधिलकी आणि मानवी मूल्यांची प्रचिती दिली आहे. अल्पशा आजाराने त्रस्त असलेले पतपेढीचे निष्ठावान कर्मचारी प्रदीप वाघ यांचे केवळ दहा दिवसांपूर्वी दुःखद निधन झाले. त्यांच्या निधनाने कुटुंबीयांवर केवळ भावनिकच नव्हे तर आर्थिक संकटही कोसळले. पतीच्या आधारावर चालणाऱ्या संसारात अचानक आलेली ही पोकळी भरून काढणे कठीण होते. अशा वेळी पतपेढीच्या संचालक मंडळाने वेगवान आणि सकारात्मक निर्णय घेऊन समाजात सहानुभूतीचा आदर्श घालून दिला. प्रगती पॅनलचे अध्यक्ष व अमळनेर येथील विद्यमान गटशिक्षणाधिकारी रावसाहेब मांगो पाटील यांच्या दूरदृष्टीपूर्ण मार्गदर्शनाखाली सोसायटीचे अध्यक्ष सचिन युवराज वाघ, उपाध्यक्ष मनोज प्रकाश पाटील, तसेच सर्व संचालक मंडळाने मयत कर्मचाऱ्याच्या कुटुंबाच्या आर्थिक व मानसिक आधारासाठी तातडीने बैठक बोलावली. या बैठकीत अनुकंपा तत्वावर नोकरी देण्याचा ठराव मंजूर करण्यात आला. महत्त्वाचे म्हणजे, हा निर्णय पारंपरिक प्रक्रियेतून लांबणीवर न टाकता, गंधमुक्ती व उत्तरकार्याच्या दिवशीच नोकरी आदेश देण्याचे ठरवण्यात आले. हे पाऊल घेऊन पतपेढीने केवळ कुटुंबाचा आधारच दिला नाही, तर इतर संस्थांसमोर अनुकरणीय उदाहरण ठेवले. दिनांक १४ ऑगस्ट २०२५, ठिकाण महालपुरे मंगल कार्यालय, पाचोरा — याठिकाणी मयत प्रदीप वाघ यांच्या उत्तरकार्याच्या दिवशी त्यांच्या पत्नीला नोकरी आदेश देण्यात आला. सोहळा अत्यंत सन्मानपूर्वक पार पडला. मुख्य अतिथी म्हणून मा. जि.प. सदस्य रावसाहेब मनोहर गिरधर पाटील उपस्थित होते. सोसायटीचे चेअरमन सचिन युवराज वाघ, उपाध्यक्ष मनोज प्रकाश पाटील, संचालक भागवत राजधर हाडपे, प्रविण रंगराव पाटील, अनिल फुलचंद पाटील, अशोक शांताराम इसे, तसेच गटशिक्षणाधिकारी समाधान शिवराम पाटील यांच्या हस्ते नोकरी आदेश प्रदान करण्यात आला. कार्यक्रमाला संस्थेचे माजी चेअरमन अनिल एकनाथ पाटील, राजेंद्र श्रीराम ठाकरे, जतनसिंग राजपूत, केंद्रप्रमुख कैलास देवरे, चंद्रकांत मोराणकर, शांताराम वानखेडे, खाजगी पतसंस्थेचे संचालक राकेश पाटील, राजेंद्र भिमराव पाटील, विपीन वसंतराव पाटील, विलास भास्कर पाटील, राजीव पद्मे, जितेंद्र वानखेडे, रामकृष्ण बाविस्कर, प्रदीप भाऊराव वाघ, शिसोदे सर, मनोज पवार आदी मान्यवर उपस्थित होते. याशिवाय आमदार किशोर पाटील यांचे स्वीय सहाय्यक राजू पाटील, विभागीय अधिकारी नेरपगार सर, शाखाधिकारी संजय साळुंखे, कर्मचारी सुनिल चौधरी यांच्यासह वाघ कुटुंबातील आप्तेष्ट व ग्रामस्थांनीही मोठ्या संख्येने हजेरी लावली. पतपेढीने घेतलेला हा निर्णय अनेक दृष्टिकोनातून विशेष महत्त्वाचा आहे. सर्वसाधारणपणे, अनुकंपा तत्वावरील नोकरीसाठी लागणारी प्रक्रिया दीर्घकाळ चालते; कागदपत्रे, मंजुरी, विविध शासकीय स्तरावरील पत्रव्यवहार यामुळे कुटुंबाला आर्थिक संकटातून बाहेर पडण्यासाठी महिनोन्‌महिने थांबावे लागते. मात्र, पारोळा सोसायटीने दहा दिवसांच्या आत हा आदेश देऊन नवे मानदंड निर्माण केले. या निर्णयामुळे कुटुंबाच्या तातडीच्या आर्थिक गरजा भागविण्यास हातभार लागेल. तसेच, मयत कर्मचाऱ्याच्या सेवेला दिलेला सन्मान आणि त्यांच्या कुटुंबाप्रती दाखवलेली जबाबदारी, ही संस्थेच्या कार्यपद्धतीतील मानवी संवेदनशीलतेची जिवंत उदाहरणे ठरतील. कार्यक्रमात बोलताना उपस्थित मान्यवरांनी पतपेढीच्या संचालक मंडळाच्या निर्णयाचे एकमुखाने कौतुक केले. रावसाहेब मनोहर गिरधर पाटील यांनी सांगितले, “समाजात सहानुभूती आणि वेगवान निर्णय घेण्याची वृत्ती आवश्यक आहे. आज पतपेढीने दाखवून दिले की, योग्य इच्छाशक्ती असेल तर कोणतीही प्रक्रिया त्वरेने पूर्ण होऊ शकते.” सचिन युवराज वाघ यांनी स्पष्ट केले की, “मयत सहकाऱ्याच्या कुटुंबाला आधार देणे ही केवळ आपली जबाबदारी नाही, तर आपले कर्तव्य आहे. हे पाऊल घेताना संपूर्ण संचालक मंडळाने एकदिलाने पाठिंबा दिला.” मनोज प्रकाश पाटील यांनी सांगितले, “आजचा दिवस केवळ नोकरी आदेश देण्यापुरता मर्यादित नाही; हा दिवस मानवी मूल्यांना प्राधान्य देण्याचा दिवस आहे.” नोकरी आदेश स्वीकारताना वर्षा वाघ यांच्या डोळ्यांतून अश्रू ओघळत होते. पतीच्या निधनाने निर्माण झालेल्या दुःखद परिस्थितीत समाजातून, संस्थेतून मिळालेला त्वरित आधार त्यांच्या दृष्टीने अमूल्य होता. कार्यक्रमस्थळी उपस्थित सर्वांच्या डोळ्यांत हा क्षण ओलावा आणणारा ठरला. पारोळा सोसायटीचा हा निर्णय केवळ एक प्रशासनिक पाऊल नसून, तो सामाजिक जबाबदारी, सहानुभूती आणि कार्यक्षमता यांचा संगम आहे. इतर संस्थांनी आणि संघटनांनीही या आदर्शातून प्रेरणा घेऊन अशा संवेदनशील निर्णय प्रक्रियेचा अवलंब करावा, अशी सर्वत्र भावना व्यक्त होत आहे.

आज दि.14/08/2025 चे सर्व राशीचे भविष्य व शुभ अंक व रंग

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मेष
दिवस उत्साहवर्धक आहे. नवीन कामांची सुरुवात कराल. मनातील चिंता दूर होईल. प्रतिष्ठा वाढेल.
शुभ अंक: 1 शुभ रंग: केशरी

वृषभ
विचारपूर्वक निर्णय घ्या. अचानक खर्च वाढू शकतो. घरगुती वातावरणात समजुतदारपणा ठेवा.
शुभ अंक: 6 शुभ रंग: पांढरा

मिथुन
कामात गती येईल. एखादा नवा प्रकल्प सुरू होण्याची शक्यता. कौटुंबिक आनंदात वाढ होईल.
शुभ अंक: 5 शुभ रंग: हलका हिरवा

कर्क
काही महत्त्वाचे निर्णय घ्यावे लागतील. आरोग्याची थोडी काळजी घ्या. शांत राहून कामाला लागा.
शुभ अंक: 2 शुभ रंग: चंदेरी

सिंह
दिवस यशस्वी ठरेल. वरिष्ठांचे सहकार्य लाभेल. कार्यक्षेत्रात तुमचे कौशल्य सिद्ध होईल.
शुभ अंक: 3 शुभ रंग: सोनेरी

कन्या
प्रवासाचे योग आहेत. आर्थिक व्यवहारात यश मिळेल. परंतु कुणावरही अतीविश्वास टाळा.
शुभ अंक: 7 शुभ रंग: राखाडी

तुळ
संपर्क वाढतील. सामाजिक क्षेत्रात प्रतिष्ठा मिळेल. जुने प्रश्न सुटतील. दिवस सकारात्मक आहे.
शुभ अंक: 9 शुभ रंग: गुलाबी

वृश्चिक
महत्त्वाच्या कामात विलंब होऊ शकतो. भावनिक निर्णय टाळा. कामात अधिक लक्ष द्यावे लागेल.
शुभ अंक: 4 शुभ रंग: जांभळा

धनु
नवीन संधी लाभदायक ठरतील. कुटुंबात सुसंवाद साधा. आर्थिक गुंतवणुकीत फायदा होईल.
शुभ अंक: 8 शुभ रंग: पिवळा

मकर
दिवस सौम्य आहे. कामात थोडी अनिश्चितता जाणवेल. संयम आणि वेळेचे नियोजन गरजेचे आहे.
शुभ अंक: 10 शुभ रंग: तपकिरी

कुंभ
तुमचे विचार प्रभाव टाकतील. एखादी चांगली संधी मिळेल. मानसिक प्रसन्नता राहील.
शुभ अंक: 11 शुभ रंग: निळा

मीन
आत्मविश्वास वाढेल. जुन्या मैत्रीचे पुनरुज्जीवन होईल. आर्थिक लाभ संभवतो. आरोग्य चांगले राहील.
शुभ अंक: 6 शुभ रंग: आकाशी

वाचकांनी वरील भविष्यवाणीचा अर्थ अचूक भविष्यवाणी म्हणून लावता केवळ आत्मपरीक्षण आणि सकारात्मक प्रेरणा म्हणून घ्यावा.

FMGE परीक्षेत डॉ. शुभम् गुजर यांचा उल्लेखनीय यश – पहिल्याच प्रयत्नात उत्तीर्ण

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चोपडा ( मनिष प्र महाजन भाई कोतवाल रोड Mo. 9766143638 , 098508 65961) : वैद्यकीय क्षेत्रातील सर्वांत कठीण व आव्हानात्मक मानल्या जाणाऱ्या Foreign Medical Graduate Examination (FMGE), ज्याला MCI परीक्षा असेही संबोधले जाते, या राष्ट्रीय पातळीवरील परीक्षेत चोपडा तालुक्यातील वढोदेकर कुटुंबातील डॉ. शुभम् उषा हरी गुजर यांनी पहिल्याच प्रयत्नात अभूतपूर्व यश मिळवत संपूर्ण परिसराचा अभिमान वाढविला आहे. त्यांनी एकूण 300 पैकी तब्बल 197 गुण मिळवत उत्तीर्णतेची घोडदौड केली असून, हा निकाल वैद्यकीय क्षेत्रात नावाजलेल्या व्यक्तींसाठीही आदर्श ठरणारा आहे. FMGE ही परीक्षा देशातील वैद्यकीय शिक्षण पूर्ण केलेल्या परदेशी पदवीधर डॉक्टरांसाठी भारतात वैद्यकीय व्यवसाय करण्यासाठी आवश्यक असणारी पात्रता परीक्षा आहे. या परीक्षेचे कठीणपण इतके उच्च आहे की, दरवर्षी यात बसणाऱ्या उमेदवारांपैकी केवळ 20 टक्के विद्यार्थीच यश मिळवू शकतात. याच कारणामुळे ही परीक्षा उत्तीर्ण होणे हेच एक मोठे यश मानले जाते, आणि तेही पहिल्याच प्रयत्नात साध्य करणे तर अधिक कौतुकास्पद आहे. डॉ. शुभम् यांनी हे कठीण ध्येय साध्य करून आपल्या कुटुंबाचे, गावाचे व जिल्ह्याचे नाव उज्ज्वल केले आहे. डॉ. शुभम् हे इंजि. हरीभाऊ विठ्ठल गुजर यांचे चिरंजीव आहेत. हरीभाऊ गुजर यांनी स्वतःच्या जीवनप्रवासात शिक्षण, परिश्रम आणि प्रामाणिकपणाची परंपरा जपली असून, तीच मूल्ये आपल्या मुलात रुजविली आहेत. तसेच, डॉ. शुभम् हे भगवान पाटील यांचे पुतणे असून, ऍड. रमेश गुजर (घोडसगांवकर), शिरपूर यांचे भाचे आहेत. अशा शैक्षणिक आणि सामाजिकदृष्ट्या संपन्न परिवारातून ते आले असल्याने लहानपणापासूनच त्यांच्यावर योग्य संस्कार झाले. शालेय शिक्षणापासूनच अभ्यासू वृत्ती असलेले शुभम् यांनी वैद्यकीय क्षेत्रात करिअर करण्याचा निर्णय घेतला आणि त्यासाठी त्यांनी परदेशातील प्रतिष्ठित वैद्यकीय महाविद्यालयातून MBBS पदवी प्राप्त केली. परदेशातील शिक्षण काळात त्यांनी शैक्षणिक मेहनत, रुग्णसेवेतील समर्पण आणि कठोर परिश्रमाची सवय अंगी बाणवली. मात्र, भारतात वैद्यकीय व्यवसाय करण्यासाठी MCI च्या मान्यतेनुसार FMGE परीक्षा उत्तीर्ण होणे अत्यावश्यक होते. FMGE परीक्षेची तयारी करताना त्यांनी अत्यंत नियोजनबद्ध पद्धतीने अभ्यास केला. विषयांचे सखोल आकलन, जुन्या प्रश्नपत्रिकांचा अभ्यास, वेळेचे काटेकोर नियोजन आणि सातत्यपूर्ण पुनरावलोकन यांमुळे त्यांनी हा उत्तीर्णतेचा टप्पा गाठला. त्यांच्या यशामध्ये पालकांचा पाठिंबा, कुटुंबातील मार्गदर्शन आणि शिक्षकांचे मार्गदर्शनही तितकेच मोलाचे ठरले. निकाल जाहीर झाल्यानंतर परिसरात उत्साहाचे वातावरण निर्माण झाले. कारण, या परीक्षेचा यशाचा टक्का केवळ 20% इतकाच असल्यामुळे पहिल्याच प्रयत्नात मिळविलेले यश हे अत्यंत दुर्मिळ आहे. शुभम् यांनी आपल्या संयम, चिकाटी आणि आत्मविश्वासाच्या जोरावर हे यश मिळवले आहे. त्यांच्या या कामगिरीबद्दल कुटुंबीय, नातेवाईक, मित्रमंडळी, गावकरी आणि परिचितांकडून अभिनंदनाचा वर्षाव होत आहे. वाढदिवस, लग्नसमारंभ किंवा अन्य सामाजिक कार्यक्रमांमध्ये जसे एखाद्या कुटुंबातील यशाचा आनंद साजरा केला जातो, तसाच आनंद या यशामुळेही संपूर्ण परिसरात पसरला आहे. शुभम् यांच्या कर्तृत्वामुळे तरुण पिढीला प्रेरणा मिळाली आहे की, सातत्यपूर्ण अभ्यास, योग्य नियोजन आणि सकारात्मक दृष्टिकोन असल्यास कुठलीही कठीण परीक्षा उत्तीर्ण करता येते. कुटुंबीयांचे म्हणणे आहे की, शुभम् यांचे पुढील ध्येय म्हणजे भारतातील रुग्णांना दर्जेदार आणि सहानुभूतिपूर्ण आरोग्यसेवा पुरविणे. त्यांनी आपल्या वैद्यकीय कारकिर्दीत फक्त व्यावसायिक यशावर न थांबता, समाजातील गरजू घटकांसाठीही सेवा देण्याचा निश्चय व्यक्त केला आहे. या उल्लेखनीय यशाबद्दल डॉ. शुभम् यांना समाजातील विविध क्षेत्रांमधून शुभेच्छांचा वर्षाव होत आहे. विशेषत: वैद्यकीय क्षेत्राशी संबंधित मंडळींनी त्यांच्या या कामगिरीचे कौतुक केले आहे. परदेशातील कठोर शिक्षण आणि भारतातील अवघड परीक्षा या दोन्हींचा प्रवास यशस्वीपणे पूर्ण केल्यामुळे त्यांच्याकडे वैद्यकीय क्षेत्रातील उज्ज्वल भविष्याकडे पाहिले जात आहे. शेवटी, डॉ. शुभम् उषा हरी गुजर यांचे हे यश केवळ वैयक्तिक अभिमानापुरते मर्यादित नाही, तर ते प्रेरणादायी आहे. कठीण परिश्रम, ठाम ध्येय आणि न हार मानणारी वृत्ती असल्यास कोणतेही लक्ष्य गाठता येते, याचा प्रत्यक्ष आदर्श त्यांनी घालून दिला आहे. या यशाबद्दल त्यांचे हार्दिक अभिनंदन आणि पुढील वैद्यकीय सेवेसाठी मनःपूर्वक शुभेच्छा.

स्वातंत्र्य दिन विशेष – न्यू साई मोबाइल शॉपमध्ये भव्य ऑफरची मेजवानी

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पाचोरा :- शहरातील ग्राहकांसाठी स्वातंत्र्य दिनाच्या निमित्ताने न्यू साई मोबाइल शॉप घेऊन आले आहे एक जबरदस्त व अद्वितीय ऑफर :– “1 पे 5”. ही ऑफर म्हणजे केवळ मोबाईल खरेदी नाही, तर खरेदीसोबत मिळणार आहेत तब्बल पाच अप्रतिम फायदे, जे प्रत्येक ग्राहकासाठी एक सुवर्णसंधी आहे.
ऑफरची सुरुवात :-14 ऑगस्टपासून
ठिकाण: साई मोबाईल स्टेशन रोड, पाचोरा
संपर्क :-9766240240
“1 पे 5” ऑफर म्हणजे काय? :- “1 पे 5” म्हणजे एका मोबाईल खरेदीवर पाच आकर्षक व उपयुक्त गिफ्ट्स तसेच फायदे. आजच्या स्पर्धात्मक बाजारात इतक्या मोठ्या प्रमाणात फायदे एका खरेदीवर मिळणे दुर्मिळच. त्यामुळे ही ऑफर नक्कीच प्रत्येकासाठी आकर्षक आहे.
खरेदीसोबत मिळणारे ५ फायदे
1) लक्झरी ट्रॉली बॅग :- किंमत तब्बल ₹5999 असलेली उच्च दर्जाची ट्रॉली बॅग मोफत. ही बॅग प्रवासासाठी उपयुक्त, टिकाऊ व आकर्षक डिझाईनमध्ये उपलब्ध असून, व्यवसाय प्रवास असो की कौटुंबिक सहल, ही बॅग तुमच्या स्टाईलमध्ये भर घालणार.
2) नोईस स्मार्ट वॉच :- बाजारात किंमत ₹2499 असलेले हे आधुनिक स्मार्ट वॉच तुमच्या मनगटावर केवळ वेळ दाखवणार नाही तर तुमच्या फिटनेस, कॉल्स, नोटिफिकेशन्सवर सतत लक्ष ठेवेल. मोबाईलशी ब्लूटूथद्वारे कनेक्ट होऊन, हे वॉच तुमच्या दैनंदिन जीवनाला स्मार्ट बनवेल.                                          3 :- नेक बँड (Neck Band) – किंमत फक्त ₹350 असूनही उपयुक्तता अफाट. वायरलेस म्युझिक ऐकणे, कॉल्सवर बोलणे आणि प्रवासात सहज वापर – हा नेक बँड तुमच्या गॅझेट कलेक्शनला एक परिपूर्ण जोड देईल.                                                4 :- एक्सक्लूसिव्ह डबल 2 वर्षांची वॉरंटी – साधारणपणे मोबाईलवर १ वर्ष वॉरंटी मिळते, पण या ऑफरमध्ये मिळणार आहे दुहेरी म्हणजे २ वर्षांची वॉरंटी, किंमत ₹3999 इतकी. यामुळे मोबाईलच्या देखभाल व दुरुस्तीबाबत तुमचे संरक्षण दुप्पट.
5:- ₹5000 कॅशबॅक – मोबाईल खरेदीवर थेट ₹5000 कॅशबॅक, ज्याचा लाभ विशेषतः एसबीआय (SBI) आणि एचडीएफसी (HDFC) बँक कार्डधारक ग्राहकांना मिळणार. यामुळे मोबाईल खरेदीचे एकूण खर्चात मोठी बचत होणार आहे.
ग्राहकांसाठी विशेष आकर्षण :- ही ऑफर केवळ गिफ्ट्सपुरती मर्यादित नाही, तर त्यामागे आहे न्यू साई मोबाइल शॉपचा विश्वास, दर्जा व उत्कृष्ट सेवा. येथे बाजारातील सर्व प्रसिद्ध ब्रँड्सचे मोबाईल्स, स्मार्ट वॉच, इयरबड्स, पॉवर बँक, व इतर मोबाइल अॅक्सेसरीज उपलब्ध आहेत.
मोबाईलची आधुनिक रेंज :- दुकानात उपलब्ध असलेल्या मोबाईल्समध्ये स्मार्ट डिझाईन, उच्च क्षमता बॅटरी, फास्ट चार्जिंग, शक्तिशाली कॅमेरा, 5G सपोर्ट अशा आधुनिक वैशिष्ट्यांनी परिपूर्ण मॉडेल्स आहेत. आयफोन, सॅमसंग, विवो, ओप्पो, रियलमी, रेडमी, वनप्लस इत्यादी ब्रँड्सची विविध मॉडेल्स येथे स्पर्धात्मक दरात उपलब्ध आहेत.
ही ऑफर का चुकवू नये?
   एका मोबाईल खरेदीवर पाच पटीने जास्त फायदा. बचत आणि लक्झरी दोन्हीचा आनंद. दर्जेदार ब्रँड्स व हमी असलेले उत्पादन. मर्यादित कालावधी :– 14 ऑगस्टपासून सुरू, स्टॉक उपलब्ध असेपर्यंतच लागू.
दुकानाची विश्वासार्हता
न्यू साई मोबाइल शॉप पाचोरा परिसरात गेल्या अनेक वर्षांपासून ग्राहकसेवेत अग्रस्थानी आहे. येथे मिळणारे मोबाईल आणि अॅक्सेसरीज केवळ दर्जेदारच नसून, विक्रीनंतरची सेवा (After Sales Service) सुद्धा वेगवान व विश्वासार्ह आहे.
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ग्राहकांना विनंती
ही ऑफर मर्यादित कालावधीसाठी असल्यामुळे, लवकरात लवकर भेट देऊन लाभ घ्यावा. बाजारातील वाढत्या मागणीमुळे स्टॉक लवकर संपण्याची शक्यता आहे.
पत्ता: स्टेशन रोड, पाचोरा
संपर्क: 9766240240
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चहा पेक्षा किटली गरम — पाचोरा न.पा. कर्मचाऱ्यांचा अतिक्रमण मोहिमेत अतिउत्साह, मेहनतींचा संसार उद्ध्वस्त

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पाचोरा — पाचोरा नगरपालिका प्रशासनाच्या अतिक्रमण मोहिमेचा मुद्दा सध्या शहरात मोठ्या चर्चेचा विषय ठरला आहे. या मोहिमेत अधिकाऱ्यांपेक्षा कर्मचारीच जास्त सक्रिय राहून, कार्यक्षमतेपेक्षा अधिक ‘आव आणत’ काम केल्याचा आरोप होत आहे. स्थानिक भाषेत सांगायचे तर “चहा पेक्षा किटली गरम” अशी स्थिती निर्माण झाली आहे. कारण, ज्या भागांचे अतिक्रमण काढण्याची मागणी लेखी स्वरूपात करण्यात आली होती, त्या भागांकडे दुर्लक्ष करून इतर ठिकाणचे अतिक्रमण काढण्यात नगरपालिका कर्मचाऱ्यांनी आघाडी घेतली. विशेष बाब म्हणजे, १३ ऑगस्टपासून सुरु झालेल्या या मोहिमेत, अनेक दैनंदिन हातमजुरीवर पोट भरणाऱ्या चहा विक्रेते, फुल विक्रेते नागरिकांच्या उपजीविकेवर कुऱ्हाड कोसळली आहे. याहूनही गंभीर बाब म्हणजे, अतिक्रमण काढण्याच्या कारवाईदरम्यान “ही कारवाई पत्रकार संदीप महाजन यांच्या तक्रारीवरूनच सुरु आहे” असा गैरसमज मुद्दाम पसरविण्यात आल्याचे आरोप आहेत. त्यामुळे, खरी मागणी आणि प्रत्यक्ष अंमलबजावणी यातील तफावत, तसेच अनावश्यक गोंधळामुळे शहरात संतापाची लाट पसरली आहे. ध्येय न्यूजचे संपादक संदीप महाजन यांनी पाचोरा नगरपालिका प्रशासनाला दिलेल्या निवेदनात तसेच प्रकाशित बातमीत स्पष्ट शब्दांत मागणी केली होती की — राजीव गांधी टाऊन हॉल समोरील महादेव मंदिरापासून ते सुलभ स्वच्छालयापर्यंतचे अतिक्रमण तातडीने काढावे. ही मागणी केवळ त्या ठिकाणापुरती मर्यादित होती आणि उद्देश स्पष्ट होता — हुतात्मा स्मारकाजवळील सार्वजनिक जागेची स्वच्छता, सौंदर्य आणि अडथळामुक्त वापर सुनिश्चित करणे. कारण, या भागात काही अतिक्रमण धारकांकडून अस्वच्छता, कचरा टाकणे आणि सार्वजनिक ठिकाणाचा विद्रुपीकरण केल्याच्या तक्रारी होत्या. तथापि, प्रत्यक्ष कारवाई करताना न.पा. प्रशासनाने “वड्याचे तेल वांग्यावर काढावे” अशा पद्धतीने ज्या जागांबाबत कुठलीही मागणी नव्हती, त्या ठिकाणी अतिक्रमण काढण्याचा मोहिमेचा फोकस वळवला. यामुळे, गेल्या २५ वर्षांपासून मेहनतीने हातावर पोट भरणाऱ्या, रोजंदारीवर संसार चालवणाऱ्या व्यावसायिकांच्या उपजीविकेवर एकदम संकट आले. या लोकांनी आपल्या घामाच्या जोरावर लहानमोठे धंदे उभे केले ( ते सुद्धा कष्टाचे अवैध धंदे नाही ) होते. मात्र, अचानक झालेल्या या कारवाईत त्यांची साधनसामग्री, दुकानातील माल, शेड्स इत्यादी हटवून टाकण्यात आले. स्थानिक व्यावसायिकांच्या मते, “आम्ही कुणाचं नुकसान केलं नाही, फक्त कष्टाने घर चालवत होतो. पण न.पा. कर्मचाऱ्यांनी चुकीच्या पद्धतीने आमच्यावर कारवाई केली. आता आमच्या मुलाबाळांचं पोट कशाने भरायचं?” याहून चिंतेची बाब म्हणजे, कारवाईदरम्यान आणि नंतर काही कर्मचाऱ्यांनी, जाणीवपूर्वक, “ही कारवाई पत्रकार संदीप महाजन यांच्या तक्रारीवरून होत आहे” अशी अफवा पसरवली. यामुळे, खरी मागणी, जी मर्यादित आणि न्याय्य होती, ती विकृत स्वरूपात लोकांसमोर मांडली गेली. संदीप महाजन यांनी मात्र स्पष्ट केले की — “माझी मागणी फक्त राजीव गांधी टाऊन हॉल समोरील, महादेव मंदिर ते सुलभ स्वच्छालय या मर्यादित भागातील अतिक्रमण धारकांविरोधात होती. जेथे गलिच्छ घाण करतात, सार्वजनिक ठिकाणाचे सौंदर्य बिघडवतात आणि नागरिकांना त्रास होतो, अशा ठिकाणीच कारवाई व्हावी हेच माझं मत होतं. पण प्रशासनाने भलत्याच जागी कारवाई करून निरपराध लोकांचं नुकसान केलं.” शहरातील जाणकारांच्या मते, या संपूर्ण मोहिमेत अधिकाऱ्यांपेक्षा काही कर्मचारीच जास्त सक्रिय, किंबहुना अतिउत्साही होते. आदेश एका ठिकाणासाठी असतानाही, कर्मचाऱ्यांनी इतर भागातही कारवाई सुरू ठेवली. ज्यामुळे, कारवाईचे उद्दिष्ट आणि प्रत्यक्ष परिणाम यात मोठी दरी निर्माण झाली. याच कारणामुळे नागरिकांच्या मनात प्रशासनाविषयी अविश्वास वाढला आहे. “हे अगदी चहा पेक्षा किटली गरम” असं उदाहरण इथे तंतोतंत लागू होतं — कारण, अधिकाऱ्यांचा कारवाईचा हेतू वेगळा असताना, कर्मचाऱ्यांनी त्याला वेगळंच वळण दिलं. या प्रकरणानंतर शहरात चर्चा रंगली आहे की, प्रशासन काही ठिकाणी अतिक्रमणाबाबत सौम्य भूमिका घेतं (स्पेशली बाबजी असलेल्या ठिकाणी ) तर काही ठिकाणी आक्रमकपणे कारवाई करतं. यामुळे, “निवडक” कारवाईचा संशय बळावला आहे. संदीप महाजन यांच्या मते — “प्रशासनाने असा भेदभाव न करता, जी मागणी रास्त आहे तीच अमलात आणावी. तसेच, चुकीच्या ठिकाणी केलेली कारवाई तात्काळ दुरुस्त करून, ज्यांचा व्यवसाय उद्ध्वस्त झाला आहे त्यांना पूर्ववत करून रोजगार परत द्यावा.” एक तर सध्या मार्केटमध्ये धंदे नाहीत शिवाय दैनंदिन हातमजुरी करून उपजीविका चालवणाऱ्या नागरिकांचा प्रश्न आता गंभीर आहे. कारवाईमुळे त्यांचे उत्पन्न बंद झाले असून, त्यांच्या कुटुंबियांना उपासमारीचा धोका निर्माण झाला आहे. शाळेत जाणारी मुलं, घरातील वयोवृद्ध पालक, रोजच्या अन्नाचा प्रश्न — हे सर्व एका चुकीच्या कारवाईमुळे धोक्यात आले आहेत. शहरातील अतिक्रमणाचा मुद्दा अनेक वर्षांपासून आहे. काही अतिक्रमण सार्वजनिक ठिकाणी अस्वच्छता, वाहतुकीची अडचण आणि सौंदर्य बिघडवतात. काही मात्र निरुपद्रवी स्वरूपाचे असून, तेथील लोकांचे एकमेव उत्पन्नाचे साधन असते. प्रशासनाने या दोन प्रकारात स्पष्ट फरक करूनच कारवाई करणे गरजेचे आहे. अन्यथा, चुकीच्या ठिकाणी केलेली कारवाई नागरिकांमध्ये असंतोष, आंदोलन आणि कायदेशीर वाद वाढवेल. या प्रकरणाने काही महत्त्वाचे मुद्दे उघड केले आहेत — न्याय्य मागणी आणि प्रत्यक्ष कारवाई यातील तफावत — प्रशासनाने मागणीची अचूक व्याप्ती समजून घेणे गरजेचे. कर्मचाऱ्यांचा अतिउत्साह रोखणे — आदेश पाळणे हे कर्तव्य असले तरी, आदेशापेक्षा जास्त आणि वेगळं काम करणे टाळावं. नागरिकांचा विश्वास परत मिळवणे — चुकीच्या कारवाईत नुकसान झालेल्यांना तातडीने भरपाई किंवा पर्याय द्यावा. भविष्यातील अतिक्रमण मोहीम पारदर्शक करणे — निवडक कारवाई टाळावी आणि सर्वांसाठी एकसमान नियम लागू करावेत. पाचोरा नगरपालिका प्रशासनाने अतिक्रमणाचा मुद्दा हाताळताना अधिकाऱ्यांपेक्षा काही कर्मचारीच अधिक सक्रिय होत, चुकीच्या ठिकाणी कारवाई केल्याने परिस्थिती चिघळली आहे. नागरिकांमध्ये संताप, व्यावसायिकांचे नुकसान आणि पत्रकारांवर अनाठायी बोट दाखविण्याचा प्रकार हे सर्व मिळून या प्रकरणाला आणखी गंभीर बनवत आहेत. आता प्रशासनाने परिस्थितीचे गांभीर्य लक्षात घेऊन, चुकीचे पाऊल परत घेणे, नुकसानभरपाई देणे आणि भविष्यात न्याय्य, पारदर्शक व संतुलित पद्धतीने अतिक्रमण प्रश्न सोडविणे हीच खरी वेळ आहे.

आज दि.13/08/2025 चे सर्व राशीचे भविष्य व शुभ अंक व रंग

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मेष
नवीन कल्पना प्रभावी ठरतील. सामाजिक मान-सन्मान मिळेल. महत्वाची कामे पार पाडाल. जुने प्रश्न सुटतील.
शुभ अंक: 3 शुभ रंग: तांबडा

वृषभ
आज शांतपणे निर्णय घ्या. आर्थिक बाजू बळकट होईल. कामात स्थिरता राहील. घरात आनंदाचे वातावरण.
शुभ अंक: 6 शुभ रंग: पांढरा

मिथुन
मन आनंदी राहील. मित्रपरिवाराकडून आनंददायक बातमी मिळेल. एखादा अचानक लाभ संभवतो.
शुभ अंक: 5 शुभ रंग: हिरवा

कर्क
दिवस मध्यम आहे. कामात थोडा त्रास संभवतो. आरोग्याकडे दुर्लक्ष नको. शांततेने निर्णय घ्या.
शुभ अंक: 2 शुभ रंग: चंदेरी

सिंह
तुमचे विचार ऐकले जातील. कार्यक्षेत्रात यश मिळेल. नवीन संधी मिळण्याची शक्यता. आत्मविश्वास वाढेल.
शुभ अंक: 1 शुभ रंग: केशरी

कन्या
जुने व्यवहार पूर्ण होण्याची शक्यता. कामात अचूकता ठेवावी लागेल. अनावश्यक खर्च टाळा.
शुभ अंक: 7 शुभ रंग: राखाडी

तुळ
दिवस उत्साहदायक असेल. मनाजोगती कामे पार पडतील. सौंदर्य व कलात्मक कामात रस वाटेल.
शुभ अंक: 9 शुभ रंग: गुलाबी

वृश्चिक
गोंधळाची स्थिती निर्माण होऊ शकते. स्वतःचे मत ठामपणे मांडा. निर्णयात विलंब करू नका.
शुभ अंक: 4 शुभ रंग: गडद जांभळा

धनु
नवे कार्य सुरू करण्यास योग्य वेळ. नशिबाची साथ लाभेल. विद्यार्थ्यांसाठी प्रगतीचा दिवस.
शुभ अंक: 8 शुभ रंग: पिवळा

मकर
घरातील वातावरण आनंददायक राहील. एखाद्या महत्त्वाच्या व्यक्तीची भेट घडेल. निर्णय सकारात्मक ठरतील.
शुभ अंक: 10 शुभ रंग: तपकिरी

कुंभ
थोडा मानसिक तणाव जाणवू शकतो. खर्च वाढू शकतो. परिश्रमाचे योग्य फळ मिळेल. संयम बाळगा.
शुभ अंक: 11 शुभ रंग: निळा

मीन
आज तुम्हाला मन:शांती लाभेल. जोडीदाराचा सल्ला उपयुक्त ठरेल. आर्थिक लाभ मिळण्याची शक्यता.
शुभ अंक: 6 शुभ रंग: आकाशी

वाचकांनी वरील भविष्यवाणीचा अर्थ अचूक भविष्यवाणी म्हणून लावता केवळ आत्मपरीक्षण आणि सकारात्मक प्रेरणा म्हणून घ्यावा.

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